ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत की अफवाहों के बीच रजा पहलवी ने क्या संकेत दिया

ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत की अफवाहों के बीच रजा पहलवी ने क्या संकेत दिया

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की सेहत को लेकर सोशल मीडिया से लेकर अंतरराष्ट्रीय गलियारों तक अटकलों का बाजार गर्म है। कोई उन्हें मृत बता रहा है तो कोई कोमा में होने का दावा कर रहा है। इसी बीच ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी का एक बयान सामने आया है जिसने इन चर्चाओं को और हवा दे दी है। रजा पहलवी ने सीधे तौर पर खामेनेई की मौत की पुष्टि तो नहीं की लेकिन उनके शब्दों में एक बड़े बदलाव की आहट साफ महसूस की जा सकती है। यह महज एक राजनीतिक बयान नहीं है बल्कि उस सिस्टम के खिलाफ एक ललकार है जो दशकों से ईरान की सत्ता पर काबिज है।

अयातुल्ला खामेनेई की उम्र 85 साल से ज्यादा हो चुकी है। लंबे समय से उनके बीमार होने की खबरें आती रही हैं। हाल ही में न्यूयॉर्क टाइम्स और इजरायली मीडिया ने दावा किया कि खामेनेई गंभीर रूप से बीमार हैं और उनके उत्तराधिकारी को लेकर गुपचुप तरीके से बैठकें हो रही हैं। इसी पृष्ठभूमि में रजा पहलवी का हस्तक्षेप बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि वे उस राजवंश के उत्तराधिकारी हैं जिसे 1979 की इस्लामी क्रांति ने बेदखल कर दिया था।

रजा पहलवी का बयान और उसके पीछे का असली संदेश

रजा पहलवी ने अपने संबोधन में साफ कहा कि ईरान एक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है। उन्होंने ईरानी जनता और विशेष रूप से देश की सेना और सुरक्षा बलों से अपील की कि वे इस नाजुक वक्त में सही पक्ष का चुनाव करें। पहलवी का मानना है कि खामेनेई के बाद का ईरान अब दूर की कौड़ी नहीं है। उन्होंने यह संकेत दिया कि सत्ता का जो ढांचा खामेनेई के इर्द-गिर्द खड़ा किया गया था, वह उनके न रहने पर ताश के पत्तों की तरह ढह सकता है।

ईरान के भीतर सक्रिय विपक्षी गुटों के लिए यह उम्मीद की किरण है। प्रिंस ने अपने संदेश में यह स्पष्ट किया कि वे सत्ता हथियाने के लिए नहीं बल्कि एक लोकतांत्रिक ट्रांजिशन के लिए तैयार हैं। उनके समर्थकों का मानना है कि अगर खामेनेई की स्थिति वास्तव में नाजुक है, तो देश के भीतर एक बड़ा विद्रोह भड़क सकता है। रजा पहलवी इसी विद्रोह को एक दिशा देने की कोशिश कर रहे हैं। वे जानते हैं कि बिना सेना के समर्थन के सत्ता परिवर्तन मुमकिन नहीं है, इसलिए उनकी अपील का एक बड़ा हिस्सा ईरानी 'आर्टेेश' (नियमित सेना) के नाम था।

अफवाहें या हकीकत क्या खामेनेई वाकई कोमा में हैं

दुनिया भर की खुफिया एजेंसियां इस समय तेहरान की गतिविधियों पर पैनी नजर रखे हुए हैं। खामेनेई की आखिरी सार्वजनिक उपस्थिति के बाद से उनकी कोई नई तस्वीर या वीडियो सामने नहीं आया है जिसने शक को और गहरा कर दिया है। ईरानी सरकारी मीडिया ने हाल ही में खामेनेई की एक पुरानी तस्वीर साझा कर यह दिखाने की कोशिश की कि वे स्वस्थ हैं और आधिकारिक कामकाज देख रहे हैं। लेकिन यह कोशिश उल्टी पड़ती दिख रही है। लोग पूछ रहे हैं कि अगर वे ठीक हैं तो लाइव आकर देश को संबोधित क्यों नहीं करते?

ईरान में सूचनाओं को दबाने का पुराना इतिहास रहा है। जब पूर्व राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी का हेलीकॉप्टर क्रैश हुआ था, तब भी घंटों तक सच को छुपाया गया था। खामेनेई का मामला तो उससे कहीं ज्यादा संवेदनशील है। वे सिर्फ एक राजनीतिक प्रमुख नहीं बल्कि धार्मिक सर्वोच्च पद पर आसीन हैं। उनकी मौत की खबर सार्वजनिक होते ही ईरान के भीतर और बाहर जो भूचाल आएगा, उसे संभालना तेहरान के लिए आसान नहीं होगा। रजा पहलवी इसी "वैक्यूम" यानी शून्य को भरने की तैयारी कर रहे हैं।

उत्तराधिकार की जंग और मोजतबा खामेनेई का नाम

अगर खामेनेई के स्वास्थ्य की खबरें सच हैं, तो सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगला कौन? ईरान के विशेषज्ञ बताते हैं कि खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को पर्दे के पीछे से तैयार किया जा रहा है। हालांकि, ईरान का संविधान वंशानुगत शासन की इजाजत नहीं देता, लेकिन 'असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स' पर खामेनेई का पूरा नियंत्रण है। मोजतबा को लेकर देश के भीतर काफी नाराजगी भी है। आम ईरानी नागरिक नहीं चाहते कि राजशाही खत्म होने के बाद अब "धार्मिक राजशाही" उन पर थोपी जाए।

रजा पहलवी ने अपने बयान में इसी बिंदु पर चोट की है। उन्होंने कहा कि ईरान के भविष्य का फैसला वहां की जनता को करना चाहिए, न कि किसी बंद कमरे में बैठे चंद लोगों को। पहलवी का तर्क है कि ईरान को एक ऐसी सरकार की जरूरत है जो दुनिया के साथ सामान्य संबंध बना सके और देश की चरमराई अर्थव्यवस्था को सुधार सके। वे लगातार "मैक्सिमम प्रेशर" की नीति का समर्थन करते रहे हैं ताकि मौजूदा शासन को बातचीत या सत्ता छोड़ने पर मजबूर किया जा सके।

क्षेत्र की शांति पर क्या होगा असर

खामेनेई के बाद का ईरान कैसा होगा, यह सिर्फ ईरानियों के लिए नहीं बल्कि पूरे मिडिल ईस्ट के लिए चिंता का विषय है। इजरायल और हमास के बीच जारी युद्ध में ईरान की भूमिका संदिग्ध रही है। हिजबुल्लाह और हूतियों को ईरान का सीधा समर्थन प्राप्त है। अगर तेहरान में सत्ता का केंद्र डगमगाता है, तो इन प्रॉक्सी समूहों को मिलने वाली मदद रुक सकती है।

इजरायली मीडिया इस खबर को बहुत प्रमुखता से दिखा रहा है। उनका तर्क है कि खामेनेई की गैर-मौजूदगी में ईरान के भीतर गृहयुद्ध जैसी स्थिति बन सकती है। रजा पहलवी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी सचेत किया है। उन्होंने पश्चिम से अपील की है कि वे ईरानी जनता के लोकतांत्रिक संघर्ष का समर्थन करें, न कि केवल परमाणु समझौते के पीछे भागें। प्रिंस का मानना है कि जब तक यह शासन सत्ता में है, तब तक परमाणु खतरा कभी खत्म नहीं होगा।

ईरान की जनता और बदलाव की छटपटाहट

ईरान की सड़कों पर सन्नाटा भले हो, लेकिन असंतोष की लहर बहुत गहरी है। 'महिला, जीवन, स्वतंत्रता' आंदोलन ने यह साबित कर दिया था कि युवा पीढ़ी अब पुरानी रूढ़ियों को ढोने के मूड में नहीं है। खामेनेई की मौत की अफवाहों ने इस छटपटाहट को एक नई ऊर्जा दी है। लोग सोशल मीडिया पर दबी जुबान में बदलाव की बातें कर रहे हैं।

पहलवी का बयान उन लोगों के लिए एक राजनीतिक विकल्प की तरह देखा जा रहा है जो मौजूदा सिस्टम से तंग आ चुके हैं। हालांकि, प्रिंस के लिए राह इतनी आसान नहीं है। उन्हें 'बाहरी' होने के टैग से लड़ना होगा। लेकिन जिस तरह से उन्होंने हाल के वर्षों में अपनी सक्रियता बढ़ाई है, उससे वे विपक्ष का सबसे चेहरा बनकर उभरे हैं।

ईरान में जो कुछ भी हो रहा है, उसे समझने के लिए सिर्फ आधिकारिक बयानों पर भरोसा करना बेवकूफी होगी। इतिहास गवाह है कि बड़े तानाशाहों के अंत की शुरुआत अक्सर ऐसी ही दबी-कुचली अफवाहों से होती है। रजा पहलवी ने अपनी चाल चल दी है, अब देखना यह है कि तेहरान इसका क्या जवाब देता है। अगर आप ईरान की स्थिति पर नजर रख रहे हैं, तो आने वाले कुछ दिन बहुत निर्णायक साबित होने वाले हैं। खामेनेई का स्वास्थ्य सिर्फ एक व्यक्ति की बीमारी नहीं बल्कि एक पूरे निजाम की सेहत का इम्तिहान है।

JP

Joseph Patel

Joseph Patel is known for uncovering stories others miss, combining investigative skills with a knack for accessible, compelling writing.